Friday, 19 September 2014

आबे -हयात हूँ मैं ,इक बूँद पी के देखो ,
आबाद तुझे कर दूँ ,मेरे साथ जी के देखो|

मैं इश्क़ का हूँ दरिया,कभी डूबकर तो देखो,
सहरा में भटकते हो,निकलकर तो देखो|

मुझे हिचकियाँ हैं आती,कभी याद करके देखो,
आऊँ सर पे पांव रख,कभी तो बुला के देखो|

दरवाजा खोल दूंगी,कभी झांक कर के देखो,
ताउम्र जलूं लौ बन ,दीया जलाके के देखो,

दिलकश बनाऊँ दुनियां आँखों में रख के देखो,
तुझे पंख लगा दूंगी,मेरे साथ उड़ के देखो|

कतरों का छोडो पीछा,समंदर तक आके देखो,
जन्नत में ले चलूंगी,मुझमे उतर के देखो |......गीता सिंह

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