Thursday, 23 December 2021

जाति में समस्या क्या है?

#जाति_क्या_सच_में_एक_समस्या_है?

हिन्दू जनमानस अक्सर जाति के विषय पर बैकफुट में आ जाते हैं। उन्हें पता ही नहीं होता क्या उत्तर दें!!

जाति का सीधा_सीधा अर्थ आपके कुल से। आपकी पहचान से है। आपकी पहचान समस्या कैसे हो सकती है? 
संस्कृत शब्दकोश अमरकोश और अन्य ग्रंथों के अनुसार जाति का अर्थ है सामान्य जन्म या कुल, परिवार, फैमिली  ट्री। 
 तुलसीदास रामायण में लिखते हैं:
दक्षपुत्री उमा शंकर जी का अपमान किये जाने पर बोलती हैं: 
जद्यपि दुःख दारुण जग नाना।
सबसे कठिन जाति अपमाना।।

उमा और शंकर की कौन जाति थी? 
कोई नहीं।
परिवार अवश्य था। 

यह देश लूटा गया और हार गया इसलिए नहीं कि, क्योंकि यहाँ पर सब आपस में बंटे हुए थे, बल्कि इसलिए क्योंकि सामने से जो आसमानी किताब से प्रेरित अब्राहमिक लोग यहाँ पर आए, उनके लिए तुम या तो 'काफिर' हो या 'सेमेटिक'। दूसरे शब्दों में कहें तो वे 'फनाटिक्स' हैं।
  तुम उनके लिए मात्र गुलामी कर सकते हो। वह युद्ध में हारा तो माफी मांगेगा जरूरत पड़ने पर थूक चाटेगा लेकिन वह पुनः आप पर आघात करेगा। यही हुआ है और आज भी होता आ रहा है!!
 हमारी_आपकी उदारता ने हमें पराजित किया। हमारी सहजता_सरलता ने किया। जाति ने नहीं। 

सत्य तो यह है कि इसाई लोग जहाँ जहाँ गए, उन्होंने वहां की समस्त सभ्यता को नष्ट कर दिया। यूरोप की सारी सभ्यताएँ ईसाइयों ने नष्ट किया और मिडल ईस्ट, ईरान की सारी सभ्यताएँ इस्लाम ने नष्ट किया। दोनो भाई है, दोनों की उतपत्ति एक ही स्थान से हुआ है। 

मुस्लिमों के 300 वर्ष शासन के बाद भी भारत आज जीवित है आखिर क्यों? भारत में ऐसी क्या व्यवस्था थी जिससे हम बचे?

   मुस्लिमों के बाद आते हैं ईसाई लोग। ईसाइयों की 200 वर्ष शासन काल के बाद भी हम और हमारी सभ्यता, दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता आज ही जीवित है, और डंके की चोट पर अपनी बात रख रहा है।आखिर ऐसा क्या था भारत में,, जिससे हम बचे रहे?

  अरे यही हमारी जाति व्यवस्था ही तो वो शक्ति है।  यह #लोक_संस्कृति से विकसित एक ब्रह्मास्त्र है। इसाई ब्रिटिश के 100 वर्ष शाशन के बाद भी, यहाँ कोई कन्वर्ट नहीं हो रहा था।
 ऐसा क्या था? इस बात को समझने के लिए आपको #मैक्समूलर के कथन को समझना होगा:
 "हिंदुओं को कन्वर्ट करने में सबसे बड़ी बाधा यहाँ की कास्ट सिस्टम है।"
 फिर इसके बाद 1872 दूसरा पादरी "एम ए शेररिंग" आता है। वह कास्ट को निशाना बनाता है। कास्ट बुरा है। बीमारी है। कास्ट ब्राह्मणों की वजह से बना है। आपको अपने जाति को लेकर जो अवधारणा है, वह सब इसी एम ए शेरिंग की देन है। उसकी बात आजकल हर "टॉम डिक एंड हेरी" अपने भाषण में कहते है। 

इसी जाति के वजह से भारत दुनियां की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति थी। 1750 ई तक 24% जीडीपी थी हमारी।। सबसे ज्यादा समृद्ध थे हम। तो यहाँ पर शोषित और वंचित कौन था?  कोई नहीं!! यहाँ तक इसका कोई  भी रिकॉर्ड नही है। अपितु, जितने भी विदेशी यात्री भारत आए हैं। सब ने भारत को हमेशा समृद्ध ही कहा है। कई फ़्रांससी यात्री 17वीं शताब्दी में भारत आए उन्होंने भी ऐसा ही कहा है। 
  डॉ अम्बेडकर एक भी उदाहरण नहीं दे पाए!!

मूल समस्या तब आयी जब इस देश के #लोक_संस्कृति से विकसित जाति के परम्परागत व्यवसाय को नष्ट कर दिया गया। 1750 ई के बाद, मात्र 200 वर्ष में 45 USD trillion लूटा गया, जो आज अमेरिका की इकोनॉमी का दो गुना है। यही से अभाव की मनोस्थिति उतपन्न हुई। और इसी अभाव को समस्त इसाई मिशनरीयो,वामपंथियों  ने #मैकाले_इसाई शिक्षा पद्धति से प्रभावित किया।

   नहीं तो आप देख लीजिए, 1871 ई की जनगणना में कोई #Lower_caste या #Upper_caste नहीं है। ईसाइयों के लूट से यहाँ पर एक बहुत बड़ा वर्ग उतपन्न हुआ जिसको डिप्रेस्ड क्लास बोला गया, बाद में 1930s में उन्हें ही #Untouchables बोला गया। 

और रही बात उनकी जो 'जाति_व्यवस्था को' वैज्ञानिक सोच नहीं कहते है। इससे समानता नहीं बनती है।।ऐसा कहने वाला व्यक्ति विज्ञान से अनभिज्ञ होता है। विज्ञान का आधार ही भेद है,विभिन्नता है। यदि वह भेद नहीं कर सकता तो कैसा वैज्ञानिक है। साथ_साथ वह सबके भेद को जानते हुए भी एक ही मानता है। भेद को स्वीकारता है। उदाहरण स्वरूप: Chemistry का आधार ही भेद है और वहीं पर Physics सभी वस्तुओं को एक समान दृष्टि से देखता है। कहने का अर्थ यह हुआ, भेद को स्वीकार कर, समरूप दृष्टिकोण ही विज्ञान है। यही हमारे #वेद का आधार है। 

साथ ही साथ विज्ञान वही है, जो आपको आजीविका दे। क्या आपकी जाति ने आपके लिए आजीविका नहीं दिया है??और आज आप उसी जाति के विध्वंस के बारे में सोचते रहते हैं बिना सच को जाने!! 

तो अभी आप निर्णय ले कि जाति का महत्व क्या है!!

मैं नहीं कहता कि आप इसे कट्टर रूप से माने ही। लेकिन, आप अभाव एवं प्रभाव की वजह से अपने कुल को दोष देना बंद कीजिए। 

Singh Tri Bhuwan